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Pratidin Ek Kavita

by Nayi Dhara Radio

Today: #53 in Arts, India on our combined chart.

Chart positions today · India

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Ranking history · India

Latest daily rankings: Oct 13. New rankings will appear after the next update.

History builds daily. We started tracking this show on the Arts, India chart recently, so the trend line appears after a second day of data.
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Oct 13#53#55#26

Latest episodes

  • Kharepan Ka Ehsaas | Kanhaiya Lal Nandan

    October 13, 2026 · 1 min

    खारेपन का अहसास । कन्हैयालाल नंदन खारेपन का अहसास मुझे था पहले से पर विश्वासों का दोना सहसा बिछल गया कल, मेरा एक समंदर गहरा-गहरा सा मेरी आंखों के आगे उथला निकल गया।

  • Khut Jayein | Nilesh Raghuvanshi

    October 12, 2026 · 2 min

    खुट जाएँ । नीलेश रघुवंशी  नए साल के आगमन पर पूछा गया सिंघाड़े बेचने वाली से नए साल के बारे में क्या सोचा है तुमने सिंघाड़े बेचती स्त्री ने कहा नए साल में हम खुट जाएँ खुट जाएँ मतलब.. खुट जाएँ मतलब खुट जाएँ याने हम मर जाएँ ही ही हा हा ही…

  • Ek Baar | Rajula Shah

    October 11, 2026 · 2 min

    एक बार । राजुला शाह बह जाने देना उड़ जाने देना अपने आप को एक बार तुम भी। गुब्बारे-सा हवा के बुलबुले-सा हल्का होगा तुम्हारा मन और कहीं भी जा सकेगा बिला रोक-टोक फिर- प्रेम से इन्तज़ार में इन्तज़ार से मौन में मौन से निपट शून्य में और…

  • Chandini | Ramvilas Sharma

    October 10, 2026 · 2 min

    चाँदनी । रामविलास शर्मा चाँदी की झीनी चादर-सी फैली है वन पर चाँदनी। चाँदी का झूठा पानी है यह माह-पूस की चाँदनी। खेतों पर ओस-भरा कुहरा, कुहरे पर भीगी चाँदनी; आँखों में बादल-से आँसू, हँसती है उन पर चाँदनी। दु:ख की दनिया पर बुनती है माया…

  • Parcham | Kumar Ambuj

    October 9, 2026 · 3 min

    परचम।  कुमार अम्बुज  वहाँ एक फूल खिला हुआ है अकेला  कोई उसे छू भी नहीं रहा है  किसी सुबह शाम में वह झर जाएगा  लेकिन देखो, वह खिला हुआ है बारिश, धूल और यातनाओं को और ऋतुओं को  जज़्ब करते हुए  एक पत्थर भी है वहाँ किसी की प्रतीक्षा…

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  • Buri Aurat Ke Sapnon Mein | Kailash Manhar

    October 8, 2026 · 2 min

    बुरी औरत के सपनों में । कैलाश मनहर बुरी औरत के सपनों में नहीं होता पति और चरित्र और मर्यादाएँ बन्द खिड़कियों वाला पिंजरेनुमा घर बुरी औरत के सपनों में नहीं होती बदन को धरती बनाकर धान कुटवाने वाली निर्जीव सहन-शक्ति बचपन के प्रेम को भूल…

  • Prem Ki Anivaaryata | Hemant Deolekar

    October 7, 2026 · 2 min

    प्रेम की अनिवार्थता ।  हेमंत देवलेकर बहुत असंभव-से आविष्कार किए प्रेम ने और अंततः हमें मनुष्य बनाया लेकिन अस्वीकार की गहरी पीड़ा उस प्रेम के हर उपकार का ध्वंस करने पर तुली दिया जिसने सब कुछ न्यौछावर कर देने का भोलापन, तर्क न करने की…

  • Sandhya Vandana | Sumitranandan Pant

    October 6, 2026 · 2 min

    सांध्य वंदना । सुमित्रानंदन पंत जीवन का श्रम ताप हरो हे! सुख सुषुमा के मधुर स्वर्ण हे! सूने जग गृह द्वार भरो हे! लौटे गृह सब श्रान्त चराचर नीरव, तरु अधरों पर मर्मर, करुणानत निज कर पल्लव से विश्व नीड प्रच्छाय करो हे! उदित शुक्र अब, अस्त…

  • Aaj Shaam Hai Bahut Udaas | Bhagwati Charan Verma

    October 5, 2026 · 3 min

    आज शाम है बहुत उदास । भगवतीचरण वर्मा आज शाम है बहुत उदास केवल मैं हूँ अपने पास । दूर कहीं पर हास-विलास दूर कहीं उत्सव-उल्लास दूर छिटक कर कहीं खो गया मेरा चिर-संचित विश्वास । कुछ भूला सा और भ्रमा सा केवल मैं हूँ अपने पास एक धुन्ध में कुछ…

  • Pin Bahut Saare | Kunwar Bechain

    October 4, 2026 · 2 min

    पिन बहुत सारे। कुँअर बेचैन जिंदगी का अर्थ मरना हो गया है और जीने के लिये हैं दिन बहुत सारे । इस समय की मेज़ पर रक्खी हुई जिंदगी है 'पिन-कुशन' जैसी दोस्ती का अर्थ चुभना हो गया है और चुभने के लिए हैं पिन बहुत सारे। निम्न-मध्यमवर्ग…

  • Baaghi Biyabaan Auratein | Aishwarya Tiwari

    October 3, 2026 · 4 min

    बागी बियाबान औरतें।  ऐश्वर्या तिवारी   लोग कहते हैं वो औरत है ही कहाँ, ज़्यादा  सही शब्द है आफ़त। उसके गले में कोई मंगलसूत्र नहीं, एक सूखी नदी लटकी है जिस पर कभी किसी ने नाव चलाने की ज़िद की थी और आधे में ही डर गया। वो हँसती है तो लगता…

  • Pyaar | Sarveshwar Dayal Saxena

    October 2, 2026 · 2 min

    प्यार । सर्वेश्वरदयाल सक्सेना इस पेड में कल जहाँ पत्तियाँ थीं आज वहाँ फूल हैं जहाँ फूल थे वहाँ फल हैं जहाँ फल थे वहाँ संगीत के तमाम निर्झर झर रहे हैं उन निर्झरों में जहाँ शिला खंड थे वहाँ चाँद तारे हैं उन चाँद तारों में जहाँ तुम थीं वहाँ…

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About the show

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।